आज सुबह मेरी नजर समाचार पत्र के एक खबर पर पड़ी , मोटे- मोटे अक्षरों में हेडलाइन थी "सानिया मिर्जा की सगाई टूट गई ". तभी मेरी सालों से दबी हुई जिज्ञासा जाग गई की ये सगाई या एन्गेजमेंट का मतलब क्या है? क्या इसका केबल ये मतलब निकला जाय की दो खाली लोगो को इन्गेज कर दिया जाए और जब तक एन्गेज रहने का मन हो तब तक रहिये और उसके बाद फ्री हो जाइये . बचपन में दादी शादी के बारे में बताती थी की लड़की के पिताजी लड़के के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए पंजिकार(आजकल उसको शादीराम घरजोड़े कहते हैं) के पास जाते थे और वही पर अपने मनमाफिक रिश्ता चुनते थे और उसी पंजिकर के हाथ लड़के वालो के यहाँ अपनी लड़की का रिश्ता भेजते थे और लड़के वालो को रिश्ता पसंद आने पर रिश्ता तय भी हो जाता था और तब दोनों परिवार वाले रिश्तेदारों के साथ रिश्ता तय कर देते थे फिर शादी हो जाती थी, लकिन तब शादी से पहले के इस रस्म का कोई नाम नहीं था. उस ज़माने में बिरले ही कोई रिश्ता टूटता था, लकिन जब से इसका नाम सगाई या इगेजमेंट दिया गया है पता नहीं क्यों, ये सगाई क्यों टूट जाती है शादी तक तो पहुँच ही नहीं पाती है . तो क्या एक रश्म को नाम दिए जाने से इतन बदलाब आ सकता है. मेरे एक दोस्त है बिमलजी, शादी शुदा है, कभी खुद से बाज़ार नहीं जाते खरीददारी के लिए, मिसेज ही परचेजिंग करती हैं , एक दिन संयोग से बाज़ार चले गये फिर शाम को मेरे पास पहुँच गये कहानी बताने की रोमेश जी क्या पूछते है अब तो दिन ये आ गये हैं की बाज़ार में किसी सामान पर गारंटी नाम की कोई चीज रह ही नहीं गयी है शिर्फ़ वारंटी ही मिलती है , लकिन आज में विमलजी की बातों से इत्तफाक नहीं रखता की गारंटी नहीं मिलती है ये एंगेजमेंट एक ऐसा सामान है जिस पर गारंटी अभी भी लागू है. जब तक निभ रही है निभाओ नहीं तो बदल डालो . "रिश्ता " जो हमे हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा से बिरासत में मिली है की उसकी डूराबिलिटी इतनी कम हो गयी है की वो चाइनीज सामान की तरह हो गयी है "यूज एंड थ्रो"
जिसने इस रश्म का नामकरण "सगाई " किया था ....... व्हाट अ आईडिया सर जी .............
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