अमर आजाद हो गए हैं। ये मैं नहीं कह रहा हूँ खुद ही कहते फिर रहे हैं, कहते हैं " अब में आजाद हो गया हूँ"। मामला यहाँ तक तो ठीक-ठाक हीं है , लेकिन पलट कर फिर कहते हैं," परिवारवाद, जातिवाद, और तानाशाही से पार्टी नहीं चल सकती " । यहाँ आकर अमर सिंह के समाजवाद की हवा निकल जाती है , हम और आप मजबूर होकर ही सही यह सोचने पर विवश हो जाते हैं की पूंजीवाद का यह समाजवादी रूप इतना बदला-बदला क्यों है रंगमंच, पूंजीवाद और समाजवाद को एक मंच पर ला खड़ा करने वाला यह क्षत्रिय प्रोड्यूसर नेता जिसे बनाने बिगाड़ने की लत है आजादी की दुहाई क्यों दे रहा है । खैर इन इन आसान उत्तर तलाशने के लिए समय की ज्यादा जड़ खोदने की जरुरत नहीं है ।
पीछे मुरकर देखते हैं । एक महीना पहले समाजवादी पार्टी के इस प्रोड्यूसर ने जब पार्टी महासचिव से इस्तीफा दिया तभी समझ में आ गया था की अब इस प्रोड्यूसर को घाटे में चल रही पार्टी का ज्यादा साथ निभाने का मन नहीं है । आज तक हरेक मौके पर मुलायम की शब्द बनकर बोलने बाले अमर ने घोषणा की आज से में मुलायामवादी नहीं रहा ,आज से में समाजवादी हूँ । उनके साथ -साथ उनके प्रोडक्शन यूनिट के सभी लोग साथ के साथ समाजवादी हो गए । पर कल जब उनको पार्टी से निकला गया तो ऐसा लगा की एक और समाजवादी की नैया डूब गयी और साथ के साथ उनकी पूरी प्रोडक्शन यूनिट का ही सफाया हो गया ।
कल का मुलायामवादी आज का समाजवादी भी नहीं रहा ....... हाँ समस्या मुलायम के लिए जरुर है की उनको पार्टी रूपी फिल्म चलने के लिए एक नया प्रोडूसर ढूँढना पड़ेगा। अमर तो अपना गुजरा कर ही लेंगे ।
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