Saturday, February 27, 2010

आज क्या लिखते प्रभाष जोशी?

बहुत दिन हो गए प्रभाष जोशी को गुजरे हुए, कुछ दिन तक कई प्रकार की चर्चाएँ हुई पत्रकारिता जगत में सच बताऊँ तो हर कोई चिंतित था की जिवंत पत्रकारिता को अब कौन संभालेगा खैर ये चर्चा अब ख़त्म हो चुकी है पत्रकारिता अपने भरोसे बढाती जा रही है, खैर छोडिये इन बातों को आप सोचेंगे की आज प्रभाष जोशी को में क्यूँ याद कर रहा हूँ तो सोचिये पत्रकारिता के इस महानतम के क्रिकेट प्रेम के बारे में , याद करें तो जब गए थे तब भी सचिन तेंदुलकर ने १७५ रन बनाए थे , कल तो सचिन ने २०० बना लिए , पिछली बार अगर प्रभाष जोशी अगर बच भी जाते तो आज जरुर गुजर जाते और अगर बच जाते तो अगले दिन के जनसत्ता में कुछ ऐसा जरुर लिखते जो हमेश से उनकी आदत रही थी.
याद करते हैं प्रभाष जोशी के लेखनी को जब भी भारत मैच जीतती थी या ऐसे कहे जब भी सचिन अच्छा खेलता था प्रभाष जोशी जरुर लिखते थे। अपनी ही भाषा थी उनकी, लगता था जैसे बुंदेलखंड के समाचार पत्र को पढ़ रहे हैं भाषा का एक नया ही जोर। जिसे प्रभाष से पहले कोई सोचता भी नहीं था । कोई नहीं जनता था एक ऐसा पत्रकार भी होगा जो देहाती भाषा का राष्ट्रीय पत्रकारिता में प्रयोग करेगा, क्रिकेट के उनके प्रेम को कौन नहीं जनता सच कहे to जनसता के पहले पेज का निचला हिस्सा तो जैसे ख़त्म ही हो गया विशेष कर ऐसे दिन जब सचिन २०० रन बनाता है , आज दो दिन हो गए सचिन को २०० रन बनाए हुए पता नहीं क्यों मेरी नजर बार-बार जनसत्ता के निचले भाग पर टिक जाती है की शायद प्रभाष जोशी की वही लेखनी दिख जाएँ।

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